हिंदी,पहचान है....हिंदी दिवस पर सभी हिंदी भाषियों को शुभकामनाएं
हिंदी है, हमारी पहचान...
हम यह जानकर आश्चर्य कर सकते है कि हिन्दी शब्द खुद फारसी शब्द ‘हिन्द’ से लिया गया है. हिन्द शब्द का आशय ‘सिंधु नदी की जमीन’ से है।
14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाते हैं क्योंकि सन 1949 में आज ही के दिन भारतीय संविधान ने हिन्दी भाषा को राजभाषा का दर्ज़ा दिया था।
पर प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था इसी लिए इस दिन को 'विश्व हिन्दी दिवस' के रूप में मनाया जाता।
पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था,और आज भी विभिन्न भारतीय दूतावास विश्व में भाषा प्रसार के कार्यक्रम करते है।
ये तो हम सब जानते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा बोली और समझे जाने वाली भाषा हिन्दी है लेकिन विश्व में भी मंदारिन, स्पेनिश और अंग्रेजी के बाद हिंदी चौथी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है.
हिन्दी भारत के अलावा फिजी,सूरीनाम,मॉरिशस,गुयाना,नेपाल,त्रिनिदाद एवं टोबेगो,पाकिस्तान,चीन,बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित दुनियां के 135 देशों में किसी ना किसी रूप में बोली,समझी जाती है।
अमेरिका के 45 और विश्व भर के करीब 175 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है।
संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को हिन्दी में पहली बार 1977 में संबोधित किया गया था. तब तत्कालीन विदेश मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी में भाषण देकर देश का दिल जीत लिया था.
जहाँ अंग्रेजी में सबसे अधिक बोला जाने वाला शब्द “हेलो” है, वहीँ “नमस्ते” हिंदी का सबसे ज्यादा बोला जाने वाला शब्द है.
हिन्दी भाषा सीखना आसान माना जाता है क्योंकि इसमें शब्दों का उच्चारण ठीक वैसा होता है, जैसा कि हम लिखते है।
हिंदी भाषा में ऐसी क्या विशेषताएँ हैं जो अंग्रेज़ी में नहीं हैं?
हिंदी भाषा की वैसे तो कई विशेषताएं हैं, परंतु मेरे विचार हिंदी की सबसे बड़ी खूबी है कि यह एक वैज्ञानिक भाषा है। इसका कारण सरल रूप से यह कि हिंदी की पूर्वज संस्कृत हैं जो खुद अत्यंत वैज्ञानिक भाषा हैं।
अंग्रेज़ी एक अवैज्ञानिक भाषा है। मैं आपको कुछ उदहारण से वैज्ञानिकता का मतलब समझाता हूँ।
मान लीजिए, हमारे पास 5 वर्ण है, ‘अ, आ, इ, ई और ऋ’ और इन पाँचो वर्णों के मूल्य हैं, 1,2,3,4,5 क्रमानुसार।
अ- 1, आ-2, इ-3, ई-4, ऋ-5
अगर मैं आपको बताऊँ, आ+ई+इ = 243 होता है और इसी प्रकार इ+ऋ+अ = 351, तो बताये आ+ऋ+इ कितना होगा?
मुझे पता है आप सबने 253 ही कहा होगा, जो बहुत ही सराहनीय हैं, क्योंकि आप सब तार्किक हैं, अर्थात आप सब वैज्ञानिक रूप से सोचते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे इस तर्क नीति से हिंदी अंग्रेज़ी का क्या लेना देना। अजी, बिल्कुल लेना देना हैं। बस हमारे उदाहरण के वर्णों के मूल्यों को हटा दीजिये और उनकी जगह उच्चारण रख दीजिये।
अँग्रेज़ी में
c+u+t = cut जिसका उच्चारण हैं ‘कट’
b+u+t = but जिसका उच्चारण हैं ‘बट’
p+u+t = put जिसका उच्चारण हैं ‘पुट’ जो तर्क नीति से देखा जाए तो ‘पट’ होना चाहिए, मगर ऐसा होता नही है।
देखिए, हिंदी में
च+आ+र = चार, उच्चारण भी चार ही होता हैं।
ब+आ+र = बार, उच्चारण भी बार ही होता हैं, बोर या बीर नही।
म+आ+र = मार, उच्चारण भी मार ही होता हैं, मात या माप नही।
अच्छा, आपको बता दूँ, कि ऐसी कुछ मुश्किलें द्रविड़ियन भाषाओं में भी आती हैं।
जैसे तमिळ वर्ण माला में ‘क’ जैसा वर्ण है ‘க’, ग के लिए कोई वर्ण प्रस्तुत नही हैं, तो जब भी ‘க(यानि क)’ किसी शब्द के बीच में आता हैं तो वह ‘ग’ का उच्चारण में परिवर्तित हो जाता हैं। उदाहरण के लिए ‘विनायकम’ को लिखा ‘विनायकम’ ही जाता हैं परंतु उसका उच्चारण तमिळ में ‘विनायगम’ हो जाता है।
इस प्रकार अंग्रेज़ी एवं तमिळ जैसे भाषाओं में जैसा लिखा जाता वैसा जरूरी नही बोला जाए, जो हिंदी एवं संस्कृत में मिलता हैं।
Rni के पास कुल पंजीकृत समाचार पत्र पत्रिकाओं की संख्या 114820 है जिनमें से 46587 हिंदी भाषा के है अकेले।
दूसरे स्थान पर रहने वाले समाचार पत्र पत्रिका के रूप में 14365 के साथ अंग्रेजी है।
प्रसार संख्या को देखें तो 2016-17 में हिंदी से जुड़ें प्रकाशनों ने 48 80 89 490 तो अंग्रेजी भाषा प्रकाशनों ने 23 89 75 773 प्रसार संख्या का दावा किया।
कोलकाता से प्रकाशित आनन्द बाजार पत्र बांग्ला दैनिक 11 16 428 के साथ प्रथम स्थान पर है दूसरे स्थान पर अंग्रेजी का द टाइम्स ऑफ इंडिया 956054 के साथ दूसरे स्थान पर।
हिंदी दैनिक में जालंधर से प्रकाशित पंजाब केसरी 714888 के साथ सबसे बड़ा हिंदी दैनिक है।
पर 46 संस्करणों के साथ दैनिक भास्कर 47 36785 प्रसार संख्या रखता है।
यह है हमारा भाषायी गौरव।
एक कहानी आपने सुनी होगी,एक बार फिर पढ़े,कहानी हिंदी में है।
मैं चाहता हूं कहानी को गौर से सुने और समझे इसमें कितने शब्द अंग्रेजी के आये।
(दी गयी कहानी में कुल 18 ऐसे हिंदी शब्द हैं जिन्हें अंग्रेजी में शामिल किया जा चुका है- मैंने उन्हें रोमन में लिखकर कोष्ठक में चिन्हित कर दिया है )
” कल मैं अपने धर्म (Dharma)–गुरु(guru) की आज्ञा से जंगल (jungle) से लकड़िया लाने गया| रास्ते में मुझे कुछ ठग(thug) मिले जो मुझे घी(ghee) का लड्डू(laddoo) खाने का लालच दे रहे थे, और कह रहे थे कि ये महात्मा(mahatma) जी का प्रसाद(prasad) है और इसे खाकर मुझे निर्वाण(nirvana) प्राप्त हो जायेगा | पर मैं उनकी चाल में नहीं फंसा और अपनी मस्ती में चलता हुआ जंगल के बीचो बीच पहुंच गया| अभी मैंने कुछ ही लकड़ियाँ चुनी थीं की अचानक एक चीता(cheetah) मेरे सामने आ गया, मैं उसे देखकर घबरा गया और तेजी से भागने लगा, पर जल्दबाजी में मेरा पैजामा(pajama) एक झाडी में फँस गया और मैं गिर पड़ा | अब मेरे सामने कोई चारा ना था, चीता मेरे निकट आ रहा था| मैंने भगवान(Bhagwan) को याद किया, कि तभी मुझे पंडित(pundit) जी की बताई एक बात याद आ गयी कि- ऐसे संकट में बिना हिले-डुले पड़े रहो, मैंने वही किया और चीता थोड़ी देर में वहां से चला गया| मुझे लगा कि चलो बला टली पर तभी घोड़ों के टापों की आवाज़ सुनाई दी, डकैतों(dacoit) का एक झुण्ड कहीं से लूट(loot)-पाट कर वहां से गुजर रहा था, मैं जल्दी से पेड़ पर चढ़ गया , अब शाम भी ढल चुकी थी | मैंने रात वहीँ गुजारने का फैसला किया , अच्छा हुआ घर से चलते वक़्त माँ ने रोटी (roti) और चटनी(chutney)जबरदस्ती थैले में रख दी थी,वही खा कर मैंने अपनी भूख शांत की, सुबह होते ही मैं घर के लिए वापस निकला और मन में पक्का(pukka) फैसला किया कि अब कभी लकड़ियाँ लेने घने जंगल में नहीं जाऊँगा.”
हिंदी गौरव, हिंदी स्वाभिमान है।
संस्कृत भगिनी हिंदी से अपनी पहचान है।।
एक छोटी सी कहानी भी पढ़े आज....
बच्चे के पैदा होने के पाँच साल बाद एक दिन अचानक माँ को एहसास हुआ कि यह बच्चा हमारा नहीं लगता, क्यों न इसका DNA Test करवाया जाए।
शाम को उसका पति थका हारा ड्यूटी से घर वापस आया तो उसने अपना संदेह व्यक्त किया कि देखो यह बच्चा बड़ा विचित्र व्यवहार करता है, इसका
चलना, खाना, पीना और सोना, इत्यादि हमारे से बहुत भिन्न है। मुझे नहीं लगता कि यह बच्चा हमारा है। चलो इसका DNA Test करवाते हैं।
पति: प्रिय! तुम्हें यह बात आज अचानक पाँच साल बाद क्यों याद आ गई? यह तो तुम मुझसे पाँच साल पहले भी पूछ सकती थी...!
पत्नी (आश्चर्य चकित होते हुए) : क्या मतलब है तुम्हारा? तुम कहना क्या चाहते हो???
पति : याद करो अस्पताल की वह पहली रात जब हमारा बच्चा पैदा हुआ था और कुछ ही देर बाद उसने पैम्पर खराब कर दिया था, तो तुम्हीं ने मुझसे कहा था कि अजी सुनिए! प्लीज़ बेबी को चेंज तो कर दें, तब मैंने बड़ा हैरान होकर तुम्हारी ओर देखा था तो तुमने ही कहा था कि तुम्हारे प्यार की खातिर मैंने 9 महीने इस बच्चे को अपनी कोख में रखा है, और अब जबकि मैं हिल नहीं सकती तो क्या आप यह छोटा सा काम भी नहीं कर सकते...???
तब मैं अपने बच्चे को उठाकर दूसरे वार्ड में गया, वहाँ अपने गंदे बच्चे को चेंज करके दूसरे साफ बच्चे को उठाकर तुम्हारे साथ लाकर सुला दिया था...!!!
_नैतिक शिक्षा :- किसी को काम बताते हुए अपनी मातृभाषा का उपयोग करें, दूसरी भाषा का बेजा इस्तेमाल करेंगे तो यही चेंज होगा।... ...!!!_
लेख के अंत में अपनी दो क्षणिकाओं को आपके लिए प्रेषित कर रहा हूँ।
मेरे मन की 02 क्षणिकाएँ
_______________
- *शिव शंकर शर्मा*
हिंदी से
दूर
भागने वाले
आंग्ल प्रेमी!
सुन जरा।
माँ-Mother
बोलकर
दिल अपने को
टटोल
जरा।।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आज
सुबह-सुबह
एक हिंदी
भाषाधिकारी
का संदेश था
मेरे चलध्वनी
यंत्र पर।
Happy
Hindi day
घनचक्कर बना
सर पीट
लिया
इस सरकारी
तंत्र पर।।
।।शिव।।
हम यह जानकर आश्चर्य कर सकते है कि हिन्दी शब्द खुद फारसी शब्द ‘हिन्द’ से लिया गया है. हिन्द शब्द का आशय ‘सिंधु नदी की जमीन’ से है।
14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाते हैं क्योंकि सन 1949 में आज ही के दिन भारतीय संविधान ने हिन्दी भाषा को राजभाषा का दर्ज़ा दिया था।
पर प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था इसी लिए इस दिन को 'विश्व हिन्दी दिवस' के रूप में मनाया जाता।
पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था,और आज भी विभिन्न भारतीय दूतावास विश्व में भाषा प्रसार के कार्यक्रम करते है।
ये तो हम सब जानते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा बोली और समझे जाने वाली भाषा हिन्दी है लेकिन विश्व में भी मंदारिन, स्पेनिश और अंग्रेजी के बाद हिंदी चौथी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है.
हिन्दी भारत के अलावा फिजी,सूरीनाम,मॉरिशस,गुयाना,नेपाल,त्रिनिदाद एवं टोबेगो,पाकिस्तान,चीन,बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित दुनियां के 135 देशों में किसी ना किसी रूप में बोली,समझी जाती है।
अमेरिका के 45 और विश्व भर के करीब 175 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है।
संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को हिन्दी में पहली बार 1977 में संबोधित किया गया था. तब तत्कालीन विदेश मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी में भाषण देकर देश का दिल जीत लिया था.
जहाँ अंग्रेजी में सबसे अधिक बोला जाने वाला शब्द “हेलो” है, वहीँ “नमस्ते” हिंदी का सबसे ज्यादा बोला जाने वाला शब्द है.
हिन्दी भाषा सीखना आसान माना जाता है क्योंकि इसमें शब्दों का उच्चारण ठीक वैसा होता है, जैसा कि हम लिखते है।
हिंदी भाषा में ऐसी क्या विशेषताएँ हैं जो अंग्रेज़ी में नहीं हैं?
हिंदी भाषा की वैसे तो कई विशेषताएं हैं, परंतु मेरे विचार हिंदी की सबसे बड़ी खूबी है कि यह एक वैज्ञानिक भाषा है। इसका कारण सरल रूप से यह कि हिंदी की पूर्वज संस्कृत हैं जो खुद अत्यंत वैज्ञानिक भाषा हैं।
अंग्रेज़ी एक अवैज्ञानिक भाषा है। मैं आपको कुछ उदहारण से वैज्ञानिकता का मतलब समझाता हूँ।
मान लीजिए, हमारे पास 5 वर्ण है, ‘अ, आ, इ, ई और ऋ’ और इन पाँचो वर्णों के मूल्य हैं, 1,2,3,4,5 क्रमानुसार।
अ- 1, आ-2, इ-3, ई-4, ऋ-5
अगर मैं आपको बताऊँ, आ+ई+इ = 243 होता है और इसी प्रकार इ+ऋ+अ = 351, तो बताये आ+ऋ+इ कितना होगा?
मुझे पता है आप सबने 253 ही कहा होगा, जो बहुत ही सराहनीय हैं, क्योंकि आप सब तार्किक हैं, अर्थात आप सब वैज्ञानिक रूप से सोचते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे इस तर्क नीति से हिंदी अंग्रेज़ी का क्या लेना देना। अजी, बिल्कुल लेना देना हैं। बस हमारे उदाहरण के वर्णों के मूल्यों को हटा दीजिये और उनकी जगह उच्चारण रख दीजिये।
अँग्रेज़ी में
c+u+t = cut जिसका उच्चारण हैं ‘कट’
b+u+t = but जिसका उच्चारण हैं ‘बट’
p+u+t = put जिसका उच्चारण हैं ‘पुट’ जो तर्क नीति से देखा जाए तो ‘पट’ होना चाहिए, मगर ऐसा होता नही है।
देखिए, हिंदी में
च+आ+र = चार, उच्चारण भी चार ही होता हैं।
ब+आ+र = बार, उच्चारण भी बार ही होता हैं, बोर या बीर नही।
म+आ+र = मार, उच्चारण भी मार ही होता हैं, मात या माप नही।
अच्छा, आपको बता दूँ, कि ऐसी कुछ मुश्किलें द्रविड़ियन भाषाओं में भी आती हैं।
जैसे तमिळ वर्ण माला में ‘क’ जैसा वर्ण है ‘க’, ग के लिए कोई वर्ण प्रस्तुत नही हैं, तो जब भी ‘க(यानि क)’ किसी शब्द के बीच में आता हैं तो वह ‘ग’ का उच्चारण में परिवर्तित हो जाता हैं। उदाहरण के लिए ‘विनायकम’ को लिखा ‘विनायकम’ ही जाता हैं परंतु उसका उच्चारण तमिळ में ‘विनायगम’ हो जाता है।
इस प्रकार अंग्रेज़ी एवं तमिळ जैसे भाषाओं में जैसा लिखा जाता वैसा जरूरी नही बोला जाए, जो हिंदी एवं संस्कृत में मिलता हैं।
Rni के पास कुल पंजीकृत समाचार पत्र पत्रिकाओं की संख्या 114820 है जिनमें से 46587 हिंदी भाषा के है अकेले।
दूसरे स्थान पर रहने वाले समाचार पत्र पत्रिका के रूप में 14365 के साथ अंग्रेजी है।
प्रसार संख्या को देखें तो 2016-17 में हिंदी से जुड़ें प्रकाशनों ने 48 80 89 490 तो अंग्रेजी भाषा प्रकाशनों ने 23 89 75 773 प्रसार संख्या का दावा किया।
कोलकाता से प्रकाशित आनन्द बाजार पत्र बांग्ला दैनिक 11 16 428 के साथ प्रथम स्थान पर है दूसरे स्थान पर अंग्रेजी का द टाइम्स ऑफ इंडिया 956054 के साथ दूसरे स्थान पर।
हिंदी दैनिक में जालंधर से प्रकाशित पंजाब केसरी 714888 के साथ सबसे बड़ा हिंदी दैनिक है।
पर 46 संस्करणों के साथ दैनिक भास्कर 47 36785 प्रसार संख्या रखता है।
यह है हमारा भाषायी गौरव।
एक कहानी आपने सुनी होगी,एक बार फिर पढ़े,कहानी हिंदी में है।
मैं चाहता हूं कहानी को गौर से सुने और समझे इसमें कितने शब्द अंग्रेजी के आये।
(दी गयी कहानी में कुल 18 ऐसे हिंदी शब्द हैं जिन्हें अंग्रेजी में शामिल किया जा चुका है- मैंने उन्हें रोमन में लिखकर कोष्ठक में चिन्हित कर दिया है )
” कल मैं अपने धर्म (Dharma)–गुरु(guru) की आज्ञा से जंगल (jungle) से लकड़िया लाने गया| रास्ते में मुझे कुछ ठग(thug) मिले जो मुझे घी(ghee) का लड्डू(laddoo) खाने का लालच दे रहे थे, और कह रहे थे कि ये महात्मा(mahatma) जी का प्रसाद(prasad) है और इसे खाकर मुझे निर्वाण(nirvana) प्राप्त हो जायेगा | पर मैं उनकी चाल में नहीं फंसा और अपनी मस्ती में चलता हुआ जंगल के बीचो बीच पहुंच गया| अभी मैंने कुछ ही लकड़ियाँ चुनी थीं की अचानक एक चीता(cheetah) मेरे सामने आ गया, मैं उसे देखकर घबरा गया और तेजी से भागने लगा, पर जल्दबाजी में मेरा पैजामा(pajama) एक झाडी में फँस गया और मैं गिर पड़ा | अब मेरे सामने कोई चारा ना था, चीता मेरे निकट आ रहा था| मैंने भगवान(Bhagwan) को याद किया, कि तभी मुझे पंडित(pundit) जी की बताई एक बात याद आ गयी कि- ऐसे संकट में बिना हिले-डुले पड़े रहो, मैंने वही किया और चीता थोड़ी देर में वहां से चला गया| मुझे लगा कि चलो बला टली पर तभी घोड़ों के टापों की आवाज़ सुनाई दी, डकैतों(dacoit) का एक झुण्ड कहीं से लूट(loot)-पाट कर वहां से गुजर रहा था, मैं जल्दी से पेड़ पर चढ़ गया , अब शाम भी ढल चुकी थी | मैंने रात वहीँ गुजारने का फैसला किया , अच्छा हुआ घर से चलते वक़्त माँ ने रोटी (roti) और चटनी(chutney)जबरदस्ती थैले में रख दी थी,वही खा कर मैंने अपनी भूख शांत की, सुबह होते ही मैं घर के लिए वापस निकला और मन में पक्का(pukka) फैसला किया कि अब कभी लकड़ियाँ लेने घने जंगल में नहीं जाऊँगा.”
हिंदी गौरव, हिंदी स्वाभिमान है।
संस्कृत भगिनी हिंदी से अपनी पहचान है।।
एक छोटी सी कहानी भी पढ़े आज....
बच्चे के पैदा होने के पाँच साल बाद एक दिन अचानक माँ को एहसास हुआ कि यह बच्चा हमारा नहीं लगता, क्यों न इसका DNA Test करवाया जाए।
शाम को उसका पति थका हारा ड्यूटी से घर वापस आया तो उसने अपना संदेह व्यक्त किया कि देखो यह बच्चा बड़ा विचित्र व्यवहार करता है, इसका
चलना, खाना, पीना और सोना, इत्यादि हमारे से बहुत भिन्न है। मुझे नहीं लगता कि यह बच्चा हमारा है। चलो इसका DNA Test करवाते हैं।
पति: प्रिय! तुम्हें यह बात आज अचानक पाँच साल बाद क्यों याद आ गई? यह तो तुम मुझसे पाँच साल पहले भी पूछ सकती थी...!
पत्नी (आश्चर्य चकित होते हुए) : क्या मतलब है तुम्हारा? तुम कहना क्या चाहते हो???
पति : याद करो अस्पताल की वह पहली रात जब हमारा बच्चा पैदा हुआ था और कुछ ही देर बाद उसने पैम्पर खराब कर दिया था, तो तुम्हीं ने मुझसे कहा था कि अजी सुनिए! प्लीज़ बेबी को चेंज तो कर दें, तब मैंने बड़ा हैरान होकर तुम्हारी ओर देखा था तो तुमने ही कहा था कि तुम्हारे प्यार की खातिर मैंने 9 महीने इस बच्चे को अपनी कोख में रखा है, और अब जबकि मैं हिल नहीं सकती तो क्या आप यह छोटा सा काम भी नहीं कर सकते...???
तब मैं अपने बच्चे को उठाकर दूसरे वार्ड में गया, वहाँ अपने गंदे बच्चे को चेंज करके दूसरे साफ बच्चे को उठाकर तुम्हारे साथ लाकर सुला दिया था...!!!
_नैतिक शिक्षा :- किसी को काम बताते हुए अपनी मातृभाषा का उपयोग करें, दूसरी भाषा का बेजा इस्तेमाल करेंगे तो यही चेंज होगा।... ...!!!_
लेख के अंत में अपनी दो क्षणिकाओं को आपके लिए प्रेषित कर रहा हूँ।
मेरे मन की 02 क्षणिकाएँ
_______________
- *शिव शंकर शर्मा*
हिंदी से
दूर
भागने वाले
आंग्ल प्रेमी!
सुन जरा।
माँ-Mother
बोलकर
दिल अपने को
टटोल
जरा।।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
आज
सुबह-सुबह
एक हिंदी
भाषाधिकारी
का संदेश था
मेरे चलध्वनी
यंत्र पर।
Happy
Hindi day
घनचक्कर बना
सर पीट
लिया
इस सरकारी
तंत्र पर।।
।।शिव।।
Comments