आसान नहीं है सुनीलजी होना....
जन्मदिन अभिनंदन सुनीलजी भाईसाहब...
आसान नहीं है सुनील जी होना
जनसंख्या की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के संगठनकर्ता होना अपने-आप में जितना गौरवशाली है उतना ही काटो भरा ताज है ...
पर ताज है कहां ...? ना सत्ता का वह सिंहासन जिस पर बैठकर स्वयं कोई निर्णय कर सकें।
फिर भी कार्यकर्ताओं के विश्वास और जनता की अपेक्षा के अनुसार राज काज चले.... दीनदयाल जी का वह सपना जिसमें अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक स्वतंत्रता का लाभ पहुंचाने का आग्रह करते थे और जिसे आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ...सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास..से उसे जोड़ कर देश को एक नई गति दे रहे हैं उसे उस उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित किए जाने की जरूरत है जिसे जातिवादी मानसिकता वाले राजनेताओं ने जकड़न में ले रखा हो।
उस जकड़न से प्रदेश को बाहर लाना, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरनाऔर उत्साह को लगातार बनाए रखते हुए जनविश्वास को अर्जित करने का महत्ती कार्य संगठन की जिम्मेदारी होती है। इस जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं अपने सुनील जी।
तभी तो 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद वे पंचायतों, विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में विजय की ऐसी गाथा रच चुके हैं कि राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रबंधन के काम में माहिर माना जाने लगा है, हो भी क्यों नहीं वह उस कोटपूतली की धरा पर जन्मे है जहां साबी नदी स्वाधीन रूप से बहती है ।
जिसके बारे में लोग लोकोक्ति प्रचलित है
"अकबर की बांधी ना बंधू, ना रेवाड़ी जाऊं।
कोट तळ। कै नीकसू, साबी नाम कहाउं।।
राजस्थानी माटी की खुशबू उनके काम,काम के तरीके,कार्यकर्ताओं से संवाद,अपणायत,रणनीतिक कौशल सब में महसूस होती है।
चेहरे पर बरसती स्मित की बदली और नवाचार से राष्ट्रवाद के पथ पर युवाओं को साथ लेकर चलने का सामर्थ्य उन्हें वैशिष्ट्य प्रदान करता है ।
राजस्थान में विद्यार्थी परिषद में काम करने के दौरान अनेक अवसरों पर उनकी नवाचारी दृष्टि से रूबरू होने का अवसर युवाओं को मिला।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब साथ काम कर रहा था तब उन्हें देखकर आश्चर्य होता था कि क्या वे राजस्थान वाले ही अपने सुनीलजी ही है या फिर बरसों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में घुले मिले हैं एक राजनैतिक कार्यकर्ता।
वहां की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कार्यकर्ताओं के बारे में जिस गहनता और सूक्ष्मता से उनके पास जानकारी थी वह आश्चर्य जनक थी।
कोई कार्यकर्ता आता तो उसे दूसरे कार्यकर्ताओं के बारे में नाम सहित पूछना मुझे हमेशा अचंभित करता है,कि मात्र 2 वर्ष से भी कम समय में उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में राजनीति की चौसर पर संगठन रूपी राजा को जय पथ पर अग्रसर कर रहे थे।
कुशल नेतृत्व का ही गुण है कि युद्ध जीतना है तो इसके लिए अपने संगठन के हर कार्यकर्ता की क्षमता उसके बुद्धि,विवेक,सामर्थ्य, उसके सकारात्मक पहलू,उसकी महत्वाकांक्षाएं सब के बारे में जानकारी हो, तभी आदमी अपने संगठन को ,अपनी टीम को जय का वरण करवा सकता है।
उत्तर प्रदेश चुनाव की जय बहुत सारे पहलू हो सकते हैं मोदी जी अमित शाह जी का नेतृत्व और नीति के बाद किसी एक व्यक्ति को संगठनात्मक दृष्टि से उत्तर प्रदेश में सेहरा बांधा जा सकता है तो वह है सुनील जी बंसल ।
राजनीति में कभी कभी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर भी जब नेता व्यस्तता का आवरण ओढ़ लेते हो पर सुनील जी भाईसाहब ने उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी राजनीतिक जीत में अहम भूमिका के बावजूद वह आत्मीयता,वह सहृदयता, वह संवाद हम सब कार्यकर्ताओं से बनाए रखा है ।
उनके जन्मदिन पर राजस्थान के अपने सभी मित्र कार्यकर्ताओं की ओर से उनके स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की हम सबके आराध्य सालासर बालाजी से प्रार्थना करता हूं।
आसान नहीं है सुनील जी होना
जनसंख्या की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के संगठनकर्ता होना अपने-आप में जितना गौरवशाली है उतना ही काटो भरा ताज है ...
पर ताज है कहां ...? ना सत्ता का वह सिंहासन जिस पर बैठकर स्वयं कोई निर्णय कर सकें।
फिर भी कार्यकर्ताओं के विश्वास और जनता की अपेक्षा के अनुसार राज काज चले.... दीनदयाल जी का वह सपना जिसमें अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक स्वतंत्रता का लाभ पहुंचाने का आग्रह करते थे और जिसे आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ...सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास..से उसे जोड़ कर देश को एक नई गति दे रहे हैं उसे उस उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित किए जाने की जरूरत है जिसे जातिवादी मानसिकता वाले राजनेताओं ने जकड़न में ले रखा हो।
उस जकड़न से प्रदेश को बाहर लाना, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरनाऔर उत्साह को लगातार बनाए रखते हुए जनविश्वास को अर्जित करने का महत्ती कार्य संगठन की जिम्मेदारी होती है। इस जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं अपने सुनील जी।
तभी तो 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद वे पंचायतों, विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में विजय की ऐसी गाथा रच चुके हैं कि राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रबंधन के काम में माहिर माना जाने लगा है, हो भी क्यों नहीं वह उस कोटपूतली की धरा पर जन्मे है जहां साबी नदी स्वाधीन रूप से बहती है ।
जिसके बारे में लोग लोकोक्ति प्रचलित है
"अकबर की बांधी ना बंधू, ना रेवाड़ी जाऊं।
कोट तळ। कै नीकसू, साबी नाम कहाउं।।
राजस्थानी माटी की खुशबू उनके काम,काम के तरीके,कार्यकर्ताओं से संवाद,अपणायत,रणनीतिक कौशल सब में महसूस होती है।
चेहरे पर बरसती स्मित की बदली और नवाचार से राष्ट्रवाद के पथ पर युवाओं को साथ लेकर चलने का सामर्थ्य उन्हें वैशिष्ट्य प्रदान करता है ।
राजस्थान में विद्यार्थी परिषद में काम करने के दौरान अनेक अवसरों पर उनकी नवाचारी दृष्टि से रूबरू होने का अवसर युवाओं को मिला।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब साथ काम कर रहा था तब उन्हें देखकर आश्चर्य होता था कि क्या वे राजस्थान वाले ही अपने सुनीलजी ही है या फिर बरसों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में घुले मिले हैं एक राजनैतिक कार्यकर्ता।
वहां की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कार्यकर्ताओं के बारे में जिस गहनता और सूक्ष्मता से उनके पास जानकारी थी वह आश्चर्य जनक थी।
कोई कार्यकर्ता आता तो उसे दूसरे कार्यकर्ताओं के बारे में नाम सहित पूछना मुझे हमेशा अचंभित करता है,कि मात्र 2 वर्ष से भी कम समय में उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में राजनीति की चौसर पर संगठन रूपी राजा को जय पथ पर अग्रसर कर रहे थे।
कुशल नेतृत्व का ही गुण है कि युद्ध जीतना है तो इसके लिए अपने संगठन के हर कार्यकर्ता की क्षमता उसके बुद्धि,विवेक,सामर्थ्य, उसके सकारात्मक पहलू,उसकी महत्वाकांक्षाएं सब के बारे में जानकारी हो, तभी आदमी अपने संगठन को ,अपनी टीम को जय का वरण करवा सकता है।
उत्तर प्रदेश चुनाव की जय बहुत सारे पहलू हो सकते हैं मोदी जी अमित शाह जी का नेतृत्व और नीति के बाद किसी एक व्यक्ति को संगठनात्मक दृष्टि से उत्तर प्रदेश में सेहरा बांधा जा सकता है तो वह है सुनील जी बंसल ।
राजनीति में कभी कभी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर भी जब नेता व्यस्तता का आवरण ओढ़ लेते हो पर सुनील जी भाईसाहब ने उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी राजनीतिक जीत में अहम भूमिका के बावजूद वह आत्मीयता,वह सहृदयता, वह संवाद हम सब कार्यकर्ताओं से बनाए रखा है ।
उनके जन्मदिन पर राजस्थान के अपने सभी मित्र कार्यकर्ताओं की ओर से उनके स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की हम सबके आराध्य सालासर बालाजी से प्रार्थना करता हूं।
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