ठगी
एक समय की बात है,एक गांव में एक मोहम्मद अली नाम का काजी रहता था।वह बहुत ही सीधा और सरल इंसान था।गांव में सब लोग उसकी सरलता के कारण इज्जत करते थे।
गांव के ही चेतन नाम के एक गड़रिया से उसकी दोस्ती थी।कुछ दिन पहले ही उसके घर पहली संतान के रूप में एक लड़की का जन्म हुआ था इसका ध्यान रखते हुए चेतन ने एक दिन उसे एक बकरी देते हुए कहा-मुल्ला जी यह बकरी ले जाओ,बेटी के लिए दूध की व्यवस्था हो जाएगी,हां पर इसे हलाल मत कर देना।
काजी ने कहा-चेतन तुम मेरे दोस्त हो,तुम्हारी निशानी और उपकार के रूप में सदा मेरे पास रहेगी।
काजी बकरी को कंधे पर रखकर घर की ओर जा रहा था। रास्ते में तीन ठगों ने काजी और उसकी बकरी को देख लिया और मोहम्मद अली को ठगने का षड्यंत्र रचा। वे ठग थोड़ी-थोड़ी दूरी पर जाकर खड़े हो गए।
जैसे ही काजी पहले ठग के पास से गुजरा, तो ठग जोर-जोर से हंसने लगा। मोहम्मद अली ने इसका कारण पूछा तो ठग ने कहा, ‘काजी साहब, मैं पहली बार देख रहा हूं कि एक आप जैसा सज्जन व्यक्ति अपने कंधे के ऊपर गधे को लेकर जा रहे हैं।’ काजी को उसकी बात सुनकर गुस्सा आ गया और ठग को भला-बुरा कहते हुए आगे बढ़ गया।
थोड़ी ही दूरी पर काजी को दूसरा ठग मिला। ठग ने गंभीर स्वर में पूछा, ‘मौलाना, क्या इस गधे के पैर में चोट लगी है, जो आप इसे अपने कंधे पर रखकर ले जा रहे हैं।’ मौलवी उसकी बात सुनकर सोच में पड़ गया और ठग से कहा, ‘तुम्हे दिखाई नहीं देता है कि यह बकरी है, गधा नहीं। ठग ने कहा, - आपको किसी ने बेवकूफ बना दिया है, बकरी की जगह गधा देकर।’ काजी ने उसकी बात सुनी और सोचता हुआ आगे बढ़ गया।
कुछ दूरी पर ही उसे तीसरा ठग दिखाई दिया। तीसरे ठग ने मोहम्मद अली को देखते ही कहा, ‘काजी साहब आप क्यों इतनी तकलीफ उठा रहे हैं, आप कहें, तो मैं इसे आपके घर तक छोड़ कर आ जाता हूं, मुझे आपक़ी खिदमत का मौका मिल जाएगा।’ ठग की बात सुनकर मौलाना खुश हो गया और बकरी को उसके कंधे पर रख दिया।
थोड़ी दूर जाने पर तीसरे ठग ने पूछा, ‘काजी साहब आप इस गधे को कहां से लेकर आ रहें हैं।’ काजी ने उसकी बात सुनी और कहा, ‘भले मानस यह गधा नहीं बकरी है।’ ठग ने जोर देकर कहा, ‘कितने सीधे हो, लगता है किसी ने आपके साथ छल किया है और यह गधा दे दिया।’
मौलवी ने सोचा कि रास्ते में जो भी मिल रहा है बस एक ही बात कह रहा है। तब उसने ठग से कहा, ‘एक काम करो, यह गधा मैं तुम्हें ही दे देता हूँ, तुम ही इसे रख लो।’ ठग ने काजी की बात सुनी और बकरी को लेकर अपने साथियों के पास आ गया। फिर तीनों ठगों ने बाजार में उस बकरी को बेचकर अच्छी कमाई की और काजी ने उनकी बात मानकर अपना नुकसान कर लिया।
हमारे आसपास भी ऐस ही ठग है जो कभी हमें हमारे लक्ष्य से भटकाते है कभी हमारे अपनों से दूर करते है...ऐसे कुटिल और कपटी लोग अपनी चालों से हमेशा किसी ना किसी का नुकसान करते है।
वे सबसे पहले आपका भरोसा जितने की कोशिश करते है और जिस इंसान पर आप भरोसा करते है उस भरोसे को खण्डित करते है।
आइये,अपने भरोसे को मजबूत करें,स्व-विवेक का उपयोग करें और कुटिल ठगों से बचे।
घर पर रहिए,सुरक्षित रहिए।
।।शिव।।
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