झूठा विश्वास
एक समय की बात है एक आदमी रास्ते से गुजर रहा था कि रास्ते के पास कुछ विशाल हाथी खड़े थे और सभी हाथी जंजीर के पास तो थे लेकिन बंधे हुए नहीं थे। जिसे देखकर वह व्यक्ति सहम गया और चलते चलते रुक गया लेकिन उसके आसपास चलने वाले बिना रुके हुए ही आगे बढ़ते चले गये वे हाथियों को देखकर तनिक भी भयभीत नही हुए।
इसे देखकर उस व्यक्ति को बड़ा आश्चर्य हुआ और वह पास खड़े उन हाथियों के महावत के पास गया और उनसे पूछा की वह इन हाथियों को ऐसे खुला क्यों छोड़ रखा है ।
जिसे देखकर मै तो एक पल के लिए भयभीत भी हो गया ।कही ये हाथी अचानक हमारे ऊपर हमला न कर दे और अन्य व्यक्ति बिना डरे ही आराम से चले जा रहे है आखिर ऐसा क्यों है ?
उस व्यक्ति की इन बातो को सुनकर महावत बोला “इन हाथियों को बचपन से ही जंजीरों में बाधा जाता है और फिर इन्हें भागने के लिए भी प्रेरित किया जाता है लेकिन जंजीर से बधे होने के कारण कही भी नही जा सकते है ।इसके बाद इनकी जंजीरे भी खोलकर ये सब प्रकिया की जाती है और ऐसा तब तक इनके साथ किया जाता है,जब तक इन्हें खुद विश्वास नही हो जाता है कि बिना आज्ञा के कही भी नही जा सकते है और फिर इन्हें जंजीर से खोलकर रखे तो भी नही भाग सकते है।
अर्थात इनकी सोच एक जंजीर तक ही सिमित कर दी जाती है। ये चाहकर भी मुक्त होने के बारे में सोच नही सकते है।”
अन्य व्यक्ति जो यहाँ से गुजरे वे पहले भी गुजर चुके होंगे जिसके चलते उन्हें यह निश्चित ही पता चल गया है ये हाथी बिना जंजीर के जो बधे है वे तो न भाग सकते है और न ही लोगो को बिना किसी कारण के क्षति पंहुचा सकते है।
यह सब बाते सुनने के उस व्यक्ति की सभी शंकाए दूर हो चुकी थी और महावत के इन बातो से सीख लेते हुए आगे बढ़ गया।
क्या हम भी किसी ऐसी ही जंजीर से बंधे है,जो हमें झूठा विश्वास दिलाती है ।आइये,भ्रम के विश्वास से दूर हो अपने खुद के विश्वास के साथ जीवन का आनंद लें।
बाबा हनुमन्तलालजी हम सबको कालनेमियों के झूठे विश्वास दिलाने वाले षड्यंत्रों से मुक्त करें, यही प्रार्थना है।
।।शिव।।
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