महाशिवरात्रि -रिश्तों की महक का पर्व

रिश्तों को महकने दीजिए,सीखिए मां पार्वती और बाबा भोलेनाथ से जीवन के रंग।


वो तपस्या में लीन थी, एक ही लक्ष्य था,उसे पाना जिसके लिए जन्म पर जन्म ले रही थी।

सप्त ऋषियों ने कहा -सुनो राजकुमारी! क्यों व्यर्थ परेशान होती हो। तुम भी उसके लिए तप कर रही हो,जिसका कुछ है ही नहीं स्वयं का।

ना घर है,ना ही कोई साधन सुविधा।ना कोई काम करते है ना ही कोई इस पर विचार।

भंग के नशे में मस्त रहते है,ना आज की चिंता न कल की फिक्र।

अपने पहने के लिए नहीं है जिसके पास कपड़े वो क्या श्रृंगार करेगा तेरे?


कहां वो भस्म रमाये, जटा बढ़ाए अपनी ही मस्ती में मस्त रहने वाले और कहां तुम जैसी सुंदर  सुकुमारी।

आप जैसी सुंदर सलोनी और विदुषी राज कन्या का विवाह  तो किसी बड़े राजकुल में ही होना चाहिए इसलिए हे राजकुमारी!  यह तप छोड़कर राजमहल में लौट जाओ।

सामान्य साधु वेश में आए सप्तर्षियों को पहचानते हुए उन राजकुमारी ने कहा- हे सप्तर्षियों! उन्हें जाकर कह दीजिए कि वे स्वयं मना करेंगे तब भी मैं नहीं जाऊंगी मुझे अगर उनके लिए कर्ण जन्म लेने पड़े तब भी कोई भय नहीं है पर पति रूप में चाहिए तो केवल और केवल शिव ही चाहिए।

सप्तर्षियों ने प्रणाम करते हुए कहा हे देवी! हे मां! हम तो उनके आदेश की पालना करते हैं।

आपकी सदा ही जय हो कहकर वे शिवलोक को प्रस्थान कर गए और जाकर कहा विवाह कर लीजिए देव माता नहीं मानेगी।

यह कथा है आदि देव महादेव और माता पार्वती के विवाह की।

शास्त्रों से अलग लोक शास्त्र में शिव पार्वती का स्वरूप एक आदर्श पति पत्नी का स्वरूप है इसके हिसाब से शिव इस सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ पति है और माता पार्वती सर्व श्रेष्ठ पत्नी।

माता पार्वती हमारे घर की सामान्य स्त्रियों की तरह बार-बार पति से गुस्सा होती है और बाबा भोलेनाथ उनको मानते हैं, उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं।

विष्णु लोक सा वैभव नहीं फिर भी पत्नी की कोई इच्छा खाली नहीं जाती।

इसलिए आज भी गांव की कन्याएं जब भी  शिव की आराधना करके उनसे उनके जैसा वर मांगती है। हे नाथ! वर ऐसा दीजिए जिसके हृदय में मेरे लिए कोई छल ना रहे, धन दौलत कम हो पर गुस्सा हो जाऊं तो पति मना ले, मुझे पूरा सम्मान दे हर इच्छा पूरी करें, पूरी प्रतिष्ठा दे जैसे आप माता पार्वती के मान सम्मान,प्रतिष्ठा के लिए सदैव सचेष्ट रहे।

शिव तो शिव है पलके बंद हुई तो पता नहीं कब खुले,ना घर की चिंता ना बच्चों की,पत्नी की।

निश्छल इतने की कोई कुछ भी मांग ले, औघड़दानी सहज ही दे देते है।ऐसे ही तो होते है सामान्य पुरुष।

कैसे निर्वाह हो जीवन ऐसे शख्स के साथ,जिसे ना अपनी चिंता,ना अपनो की फिक्र।

पर माता पार्वती ने किया,उनके रंग में ही रंग गई। पूरक बनकर,उनकी शक्ति,उनका सामर्थ्य बनकर।

बाबा दैत्यों को वरदान देते और मां फिर उनसे मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती।

पार्वती ने कभी उलाहना नहीं दिया,कभी रोका नहीं,क्यों करते हो ऐसा,जो मुझे फिर सही करना पड़ता है,नहीं कहा कभी भी।

संबंधों के पीछे था पतिव्रत का धर्म और धर्म के पीछे था प्रेम।

जहां प्रेम हो,समर्पण हो,संबंधों की समझ हो, अपनत्व की सुहास हो वहां शिकायत नहीं सहकार होता है।

इसी सहकार ने अभाव को भी प्रभाव में बदल दिया। प्रभाव इतना गहरा की शिव के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटा,चाहे वो दानव था या देव रहे हो।

पति की सामाजिक प्रतिष्ठा पत्नी ही तय करती है और माता पार्वती ने इसे सिद्ध किया,यही कारण है कि पुरुष शिव आराधना में पत्नी के रूप में माता पार्वती की तरह साथ निभाने वाली पत्नी की शिवजी से मांग करते है।

जीवन में प्रेम है, एक दूजे के प्रति समर्पण है तो वक्त के झंझावातों के थपेड़े भले ही लू की तरह आते हो पर प्रेम की सुवास पाकर शीतल हो जाते है।

सत्य यही है कि जीवन में धर्म पथ पर हाथ पकड़कर साथ चलने वाला जीवन संगी मिल जाए तो जीवन का हर दिन बसंत है, एक उत्सव है। ऐसे में यह मायने नहीं रखता कि धन कितना है,प्रतिष्ठा कितनी है।

हमारे यहां तो कहा भी जाता है -

जहाँ सुमति तहाँ सम्पति नाना,

जहाँ कुमति तहाँ बिपति निदाना।

कभी जीवन में आए चिड़चिड़ेपन की तपिश तो स्मित की बदली बरसा कर देखिए। 

प्रेम,समर्पण और धर्म की त्रिवेणी में रिश्तों का सिंचन करके देखिए धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष की चतुष्पदी भी होगी ही।

शिव और पार्वती के जीवन के इसी मर्म को समझकर हमारे पुरखों ने संस्कारों की बगिया में महाशिवरात्रि का विधान रचा था।

इस महाशिव रात्रि एक बार प्रेम की प्रगाढ़ता को स्मरण करते हुए अपने जीवन को शुभता की ओर ले जाने का मन बनाईए।

मां पार्वती और बाबा भोलेनाथ आपके जीवन को सुरभित करें,शुभता प्रदान करें।

महाशिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं।

।।शिव।।

Comments

Sangeeta tak said…
ॐ नमः शिवाय
Simran sharma said…
हर हर महादेव
Shiv Sharma said…
ऊँ नमः शिवाय
Vineet said…
हर हर महादेव
Jitendra Sunda said…
ऊ नम:शिवाय ।
Suresh said…
जय हो भोले शंकर की
Veena bhojak said…
ओम् नमः शिवाय 🙏
हर दम्पति को दिन में एक बार इसे जरूर पढ़ना चाहिए यह प्रसंग बहुत प्रेरणादायक है।
Manoj said…
जय शंकर की
Anonymous said…
हर हर महादेव

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