भारत विभाजन विभीषिका की स्मृति
एक ओर आज़ादी का जश्न मनाने की आतुरता दूसरी और कुर्सी की तरफ बढ़ते नेताओं की पदलिप्सा के बीच अपने ही देश में विभाजन की विभीषिका झेल रहे करोड़ों लोगों का रुदन किसी को सुनाई ही नहीं दिया।
सिसकियां दबी रह गई, रुदन पर नेताओं का जश्न भारी हो गया। लाखों महिलाएं बलात्कार की शिकार हो गई क्योंकि मजहबी गुंडों के लिए काफिर की औरत से व्यभिचार सकून देता है।
बाप के सामने बेटी, बेटे के सामने माँ, पति के सामने पत्नी सब लाचार बेबस, बस ठगे से रह गए उन्होंने भरोसा किया था महात्मा गांधी की उस बात पर कि भारत का विभाजन होता तो मेरी लाश पर से।
रातों रात लाखों करोड़ों की दौलत घर व्यापार सब छोड़कर भागना पड़ रहा था और इधर भारत में सेक्युलर हो जाने की घूँटी पिलाकर अहिंसा परमो धर्म का शहद चटाया जा रहा था और जो शख्स अहिंसा की गोली बनाकर मजलूम हिन्दुओं को खिला रहा था वो खुद कोलकाता में गोपाल पांडा से संरक्षण मांग रहा था, हथियार सहित और हथियार भी बिना लाइसेंस के अपने पास रखकर बस उसकी जान बचा ले इस आग्रह के साथ।
अंग्रेजी हुकूमत ने हिंदुस्तान का विभाजन किया उसे हिंदुस्तान का इसके मूल निवासी अपने आप को हिंदू कहते हैं उन हिंदुओं को क्या मिला यह सवाल आज आप खुद से करिए कि जब देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ मुसलमान के लिए पाकिस्तान बना दिया गया तो फिर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में आपत्ति क्यों और अगर आपत्ति थी तो फिर कांग्रेस को यह अधिकार किसने दिया था कि वह भारत का विभाजन धर्म के आधार पर कर ले, अगर वही हिन्दुओं की प्रतिनिधि नहीं थी तो उसकी फिर हैसियत क्या थी, अंग्रेजी हुकूमत तो उसे हिंदुओं का प्रतिनिधि मानकर ही बुला रही थी और मुस्लिम लीग को मुसलमान का प्रतिनिधित्व मानकर बुला रही थी फिर मुस्लिम लीग ने तो अपने काम के लिए काम किया पर कांग्रेस ने हिंदुओं के साथ विश्वास घात किया।
आजकल लोग कहते हैं कि नेता वादा तोड़ते हैं विश्वास घात करते हैं और आजाद भारत में पहले विश्वास घात और वादा तोड़ने का पाप उन लोगों ने किया जिनको हम आजादी का श्रेय देते हैं, जिन्हें हम सम्मान देते हैं। अगर वे हमारे आदर्श हैं तो देश की राजनीति में वादा खिलाफी होगी ही।
विभाजन के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करते हुए उन नेताओं के हाथ जरा भी नहीं विचलित हुए जो इस भारत को भारत माता मानकर जयकारा लगाते थे।
एक करोड़ हिंदुओं को पाकिस्तान से पलायन करके हिंदुस्तान आना था और लगभग 50 लाख मुसलमान को पाकिस्तान जाना था हिंदू जान बचाकर भगत फिर रहा था अपनी संपत्ति को कर लो आया था पर उसे शरणार्थी बनना पड़ा दर-दर भटकना पड़ा और जिनको यहां से जाना चाहिए था वह यही रह गए जो भारत का विभाजन चाहते थे मुस्लिम लीग के समर्थन में वोट करते थे वह यही रह गए क्योंकि हमारे नेताओं को धर्मनिरपेक्षता का कीड़ा काट गया।
ऊपर से तुर्रा यह वे इसे अपनी जीत बता रहे थे,नियति से भारत का साक्षात्कार बताते रहे वह अंग्रेजों से लड़ाई को भारत की सबसे बड़ी जीत बताते रहे। जबकि इतिहास साक्षी है कि भारत ने हजारों सालों से अरबी लुटेरों, दानवी हूणों शको और मजहबी राक्षसों का मजबूती से मुकाबला किया।
राजस्थान के वीर सपूत बप्पा रावल ने तो अरबियों को इतना खदेड़ा की 500 साल तक कोई अरबी लुटेरा मजहबी दानव भारत भूमि की तरफ आंख उठाने से डरता रहा और उनकी विजय गाथा को पाठ्यक्रमों में स्थान नहीं देने का पाप भी उन स्वयंभू भारत रत्नों ने किया।
कल आज़ादी का जय नाद करें तो याद कर ले एक बार हमारे उन पुरखों के नरसंहार को, उनके बहते खून पर अबलाओं की चीख पर सत्ता पाने वाले नेताओं के मुँह से एक शब्द नहीं फूटा क्यों? हम उन नेताओं को हीरो मानते रहे क्यों?
दुनिया के सबसे बड़े नरसंहार में से एक पर एक शब्द किसी का नहीं टूटा क्योंकि ठगा गया था हिंदू, लूटा गया था हिंदू, पीटा गया था हिंदू,मौत की नींद सोया था हिन्दू।
एक बार उनको श्रद्धांजलि देना जिन्होने हिन्दू होने की कीमत चुकाई। फिर सत्ता का सुख भोगने वाले किसी को आज़ादी का हीरो मानकर जयकारा लगाओ तो आपकी मर्ज़ी।
मन में एक संकल्प जरूर लेना जैसा इजराइल के लोगों ने लिया था, हो सकता है कभी संकल्पजयी बन जाएँ हम, महाकाल का चक्र घूमेगा ही एक दिन, जैसे सागर पुत्रों को भगीरथ गंगा लेकर आये वैसे ही हमारे पुरखों को फिर से सिंधु के जल का हम आचमन कर तृप्त कार दें। इंडोनेशिया में 20 लाख लौटे है सनातन की ओर जो बदले है डर से वो हमारे संकल्प की शक्ति से, वास्तविक एकता से लौट आये फिर से मूल की ओर क्यूंकि बिना मूल के तो जलना ही होता है पेड़ को।
आइये, उन अनाम धर्मवीरों को श्रद्धा से याद करते हुए अपनी संकल्पांजलि दें।
ना चरखे से,ना टोपी से
ना एडविना की हंसी से।
सुनो,ना आजादी मिली
बकरी वाली रस्सी से।।
फांसी के फंदों पर झूले थे
जय भारत की बोले थे।
जरूरत हुई तो,बम गोले
गोरों के माथे फोड़े थे।।
कुछ लोग चिट्ठी चिठ्ठी
हर दिन खेल रहे थे।
जबर जवान हर दिन
सीने पर गोली झेल रहे थे।।
सत्ता के मीठे लड्डू फूटे मन में
कुछ देश विभाजन कर बैठे।
कुछ कर भरोसा गांधी का
सब कुछ अपना खो बैठे।।
कोटि कोटि बेघर हुए
लाखों बोटी बोटी कट गए।
कुछ सत्ता पर असवार हुए
कुछ मादरे वतन के गद्दार हुए।।
लाखों अबलाओं ने शील गंवाया
लाखों का सिंदूर जब भेंट चढ़ा।
दो टोपी वालों ने तब
आज़ादी का स्वांग रचा।
शराबी जिन्ना ने पाक रचा
चचा एक इधर सत्ता में बैठा।।
अधूरी आज़ादी को
आओ,पूर्ण बनाएंगे।
लाहौर की छाती पर
फिर ध्वज अपना फहराएंगे।।
सिंधु के जल से
विश्वनाथ का अभिषेक करेंगे।
जयपुर वाली चुनरी
ढाकेश्वरी को चढ़ाएंगे।।
।।भारत माता की जय।।
।।शिव।।
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माटी हमारी पूजा माटी हमारा वन्दन।