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Showing posts from February, 2026

शिव सदा सहाय, सबको लुभाए

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शिव भारत के महा देव हैं। इस अर्थ में महादेव हैं कि बसते हैं कैलाश में, पर रमते हैं समूचे भारतवर्ष में। जंगलों में, नदियों के किनारे, समुद्र के बीच में और पहाड़ों की चोटियों पर अपना डेरा जमा लेते हैं। तभी तो वे जन मन के देव है, पुत्र पिता रूप में देखते है और नव युवतियाँ के लिए पति रूप में शिव सा ही वर मिले इसकी कामना है, युवक की आराधना में स्वयं को सामर्थ्यशाली बनाने के लिए शिव गौरी जैसी जीवन संगिनी की प्रार्थना। आशुतोष शिव , भारतीय मन को सहज ही लुभाते हैं। ऐसे देवता से जुड़कर हर एक मन महीप बना रहता है। कभी अनुभव नहीं करता कि वह कहीं से हीन है। हाथ में भिक्षा-पात्र, पर औघड़दानी ऐसे कि कोई खाली हाथ लौटा नहीं, मनमाना लेकर गया। महाशिवरात्रि का पर्व आदि देव महादेव को याद करते हुए स्वयं सदाशिव हो जाने का दिन है। अनोखे-अद्भुत औघड़दानी जरूरी नहीं कि वे मंदिर है वहीं मिलेंगे कभी वे पेड़ के नीचे आराम करते मिल जाएंगे। कभी नदी के बीच पत्थरों के साथ केलि करते मिल जाएंगे। कभी घर-आंगन में छोटी-सी कांसे की थाली में कुछ क्षणों के लिए विराज जाएंगे और कभी केवल बमभोला के बोल में। कभी गीत में, कभी नृत्य मे...

वीबी जी रामजी - ग्रामीण भारत के सपनों को नई उड़ान

  भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरा है विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025। राष्ट्रपति ने दिसंबर 2025 में इस कानून को मंजूरी दी, और अब यह देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा का नया, मजबूत और आधुनिक रूप बन चुका है। इस नए कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब हर पात्र ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का वैधानिक रोजगार गारंटी मिलेगी—पहले यह 100 दिन था। यानी 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार, जो लाखों-लाख परिवारों के लिए अतिरिक्त कमाई, बेहतर खाना, बच्चों की पढ़ाई और छोटे-मोटे सपनों को पूरा करने का जरिया बनेगा। लेकिन यह सिर्फ दिनों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है। कानून का असली मकसद है ग्रामीण भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाना—जहाँ रोजगार सिर्फ मजदूरी न हो, बल्कि स्थायी आजीविका का आधार बने। कानून लागू होते ही कुछ लोगों ने इसे लेकर गलतफहमियाँ फैलाईं। कुछ ने कहा कि रोजगार गारंटी कमजोर हो गई है, कुछ ने केंद्रीकरण का रोना रोया, तो कुछ ने इसे बजट कटौती का बहाना बताया। लेकिन हकीकत इन दावों से ...