शिव सदा सहाय, सबको लुभाए
शिव भारत के महा देव हैं। इस अर्थ में महादेव हैं कि बसते हैं कैलाश में, पर रमते हैं समूचे भारतवर्ष में। जंगलों में, नदियों के किनारे, समुद्र के बीच में और पहाड़ों की चोटियों पर अपना डेरा जमा लेते हैं। तभी तो वे जन मन के देव है, पुत्र पिता रूप में देखते है और नव युवतियाँ के लिए पति रूप में शिव सा ही वर मिले इसकी कामना है, युवक की आराधना में स्वयं को सामर्थ्यशाली बनाने के लिए शिव गौरी जैसी जीवन संगिनी की प्रार्थना। आशुतोष शिव , भारतीय मन को सहज ही लुभाते हैं। ऐसे देवता से जुड़कर हर एक मन महीप बना रहता है। कभी अनुभव नहीं करता कि वह कहीं से हीन है। हाथ में भिक्षा-पात्र, पर औघड़दानी ऐसे कि कोई खाली हाथ लौटा नहीं, मनमाना लेकर गया। महाशिवरात्रि का पर्व आदि देव महादेव को याद करते हुए स्वयं सदाशिव हो जाने का दिन है। अनोखे-अद्भुत औघड़दानी जरूरी नहीं कि वे मंदिर है वहीं मिलेंगे कभी वे पेड़ के नीचे आराम करते मिल जाएंगे। कभी नदी के बीच पत्थरों के साथ केलि करते मिल जाएंगे। कभी घर-आंगन में छोटी-सी कांसे की थाली में कुछ क्षणों के लिए विराज जाएंगे और कभी केवल बमभोला के बोल में। कभी गीत में, कभी नृत्य मे...