चंद्र शेखर जी - संभावनाओं से भरे संगठन शिल्पी
भाजपा में संगठन महामंत्री एक विशिष्ट दायित्व है, जिसका निर्वहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से आए प्रचारक करते रहे है, राजस्थान में भी दो साल पहले तक ऐसे ही प्रचारक जो उत्तर प्रदेश से आए थे लगभग सात साल रहे, अब वे तेलंगाना में ऐसी ही जिम्मेदारी निभा रहे है।
मैं बात कर रहा हूँ श्री चंद्र शेखर जी की, जिनका आज जन्मदिन भी है। उन्होंने राजस्थान में ऐसे समय में काम संभाला जब बरसो से प्रदेश में कोई संगठन मंत्री नहीं थे, संगठन सत्ता केंद्रित हो गया था। राजनीति की यह विडंबना ही है कि संगठन सत्ता केंद्रीत होता जाता है अगर उसे संगठन तंत्र का कोई सिद्ध हस्त नहीं संभाले, इसीलिए भाजपा के नीति निर्माताओं ने इसे समझा और संगठन कोई विचार केंद्रित रखने के संगठन मंत्री जैसे दायित्व की रचना की।
चंद्रशेखर जी ने उत्तर प्रदेश से यहां आकर थोड़े ही समय में कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर अपनी अलग पहचान बना जहां कार्यकर्ता अपने मन की बात कह सकता। लोक संग्रही और विचार के आग्रही के रूप में कार्यकर्ताओं ने संगठन में अपने अभिभावक के रूप में स्वीकार किया।
उन्होंने संगठन शास्त्र के एक मंत्र पर कार्यकर्ता के लिए काम और काम के लिए कार्यकर्ता इस पर गंभीरता से कम राजस्थान में कोई बिरला ही कार्यकर्ता होगा कह सके कि मैं काम करना चाहता था और मुझे काम करने के लिए अवसर नहीं मिला की अलग बात है की अल्प शर्मिला इसको ज्यादा अवसर मिला पर काम करने वाले कार्यकर्ता के लिए उन्होंने काम निकाल कर उसकी अभिरूचि और संगठन की जरुरत को ध्यान में रखते हुए काम दिया।
उन्होने नये लोगो पर भरोसा भी किया और अपनी प्रयोगधर्मिता का खुलकर प्रदर्शन भी कि नये लोग भी जिम्मेदारी पर खरे उतरे।
सामान्य परिवार में जन्मे चंद्र शेखर जी ने सामान्य कार्यकर्ता को सदा तबब्जो दी, यही कारण है कि विपक्ष में भी कार्यकर्त्ता प्राण प्रण से जुटा हुआ रहा।
वे आदेश जारी कर स्वयं सोने वाले संगठन के अधिकारी से ज्यादा कार्यकर्ता के साथ काम करने वाले कार्यकर्ता के रूप में राजस्थान में देखे जाते रहे, चाहे रात्रि में भाजपा के झंडे बाँधने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना हो, वे उनके साथ चल पड़ते है।
चंद्र शेखर जी की अपनी विलक्षण कार्य पद्धति है, वे संगठन शास्त्र के सूत्रों को वर्तमान समय के अनुकूल प्रयोग करते है, कार्यकर्ता को काम बताकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना उनका स्वभाव नहीं, वह कार्यकर्त्ता उस जिम्मेदारी में सफल भी हो इसके प्रति स्व आग्रही भी रहते है, इसलिए पूर्व योजना, पूर्ण योजना के मंत्र को ध्यान में रखते है और जहाँ कम वहाँ हम के विचार को भी धरातल पर उतार देते है।
जब संगठन मंत्री बनकर आए तब चुनाव में ज्यादा समय नहीं था, अगर बेवजह दखल देते तो ना केवल स्थानीय नेतृत्व को दखल देने के कारण नाराज करते बल्कि कार्यकर्ताओं को भी एक ऐसे धर्म संकट में डाल देते हैं कि वे किसकी सुने, उन्होंने वह मार्ग अपनाया जो स्थानीय नेतृत्व ने पहले से तय कर रखा था।
फिर अगले 5 वर्षों में उन्होंने कार्यकर्ता कार्यक्रम कार्यालय इन सब व्यवस्थाओं को न केवल दुरुस्त किया बल्कि नया नेतृत्व विकसित कर राजस्थान को दिया।
यह राजस्थान के कार्यकर्ताओ के साथ विडंबना ही रही की राज आ गया पर राज लाने वाले संगठन शिल्पी चंद्र शेखर जी संगठन के आदेश पर नये पड़ाव की ओर तेलंगाना प्रस्थान कर गए।
आज उनके जन्मदिन पर प्रभु श्री राम से उनके उज्जवल भविष्य एवं स्वास्थ्य के लिए मंगल कामना करता हूं।
।।शिव।।

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