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कारगिल-गाथा विजय की,देश के सम्मान की,सर्वोच्च बलिदान की.... आज से 20 साल पहले भारतीय सेना ने जीता एक ऐसा युद्ध जो इतिहास में विरला ही है। दुर्गम पहाड़ियां, ऊंचाई पर बैठा दुश्मन, मौसम की मार ....पर हौसले बुलंद थे,देश के जवानों के.... साथ में था राजनीतिक नेतृत्व का मजबूत इरादा। भारत ने पहली बार युद्ध में अपनी भूमि का एक भी इंच दुश्मन को जाने से बचा लिया था। आजादी के बाद पहली बार भारत ने  युद्ध में जो जीता, उसे रणनीतिक टेबल पर हारने की गलती नहीं की। देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार,जिस के प्रधानमंत्री पूर्णता गैर कांग्रेसी थे श्री अटल बिहारी वाजपेयी । अटल जी के शांति प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान की नापाक हरकतें जारी रही तो शांति के मसीहा अपने नाम अटल की तरह अड़ गए देश के स्वाभिमान के लिए ....सेना को पूरी शक्ति और सामर्थ्य से दुश्मन को सीमा पार खदेड़ने का आदेश दे दिया । आज  वे दुनिया में नहीं है पर उनके कुशल राजनीतिक नेतृत्व को दिल से नमन। युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों का योगदान अतुलनीय है जिनकी तुलना नहीं की जा सकती वह हमारे लिए श्रद्धा के केंद्र है । आइए इस विजय के 20 ...
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सुनो,नेताओं ..... कुछ सीख सकते हो तो सीखो....स्मृति जी से। कार्यकर्ता भाव नेतृत्व का....तभी अहंकार झुका पाई,विनम्रता से इतिहास रच पाई..... एक ज्योतिरादित्य सिंधिया जी है जिनको सेल्फी नहीं खींचने से नाराज़ हुए कार्यकर्ता ने सबक सीखा दिया,उनको उनके ही गढ़ में हरा दिया। तुम कांग्रेस से हो या भाजपा से इससे कोई फर्क नहीं पड़ता,बस फर्क पड़ता है तुम्हारे व्यवहार से। वोट के लिए गली गली,घर घर चक्कर लगाने वाला,पार्टी के नाम पर लड़ने वाला, अपने व्यक्तिगत रिश्ते खराब करने वाला कार्यकर्ता जब चुनाव के बाद मिलता है तब तुम्हें फुर्सत नहीं मिलती। राजनीति से परे जाकर आज स्मृतिजी का हर उस राजनैतिक कार्यकर्ता को अभिनंदन करना चाहिए जो कार्यकर्ता भाव से अपने दल में काम करता है।  सुनो,नेताजी वोट तुम्हारे भाषणों और रणनीति से नहीं मिलते वे बस माहौल बना सकते है,तुम्हारी रणनीति को धरातल पर लाने वाला सैनिक है कार्यकर्ता। सेना में सैनिक नहीं लड़ेंगे तो क्या सेना जीतेगी...? नेता वो नहीं जो चुनाव जीतता है,वह है जो दिल जीतता है....नेताजी सुभाष,महात्मा गाँधीजी,जेपी,कर्पूरी ठाकुर,अटलजी,आडवाणीजी, मोदीजी जैसे वि...
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2014 से शुरू हुई बदलाव की बयार क्या चलती रहेगी या गंगा का आचमन रोक देगा हिन्दू वोटों की एकजुट होती ताकत को....मोदी के व्यक्तित्व के सामने बोने होते नेता क्या एकजूट होकर भी रोक पाएंगे..? क्या 2019 के परिणाम फिर  किसी मौलवी की चौखट पर सजदा करने वाले दृश्यों को जन्म देगा,या देश 2014 की शुरुआत को और अधिक बढ़ा देगा...? भारतीय लोकतंत्र का महापर्व शुरू हो चुका है, राजनीतिक पार्टियों ने अपने प्रतिनिधिओं के चयन का काम लगभग पूरा कर लिया है और बनाए गए प्रत्याशियों ने नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजनीतिक दलों के नेताओं का किसी अन्य दल के नेता को तोड़ने का तो नाराज नेता को जोड़ने का काम बखूबी चल ही रहा है।  मौसम गर्म है पर इतना भी गर्म नहीं कि 2009 की गर्मी से ज्यादा हो गया ।2009 के लोकसभा चुनाव में जिन नेताओं को मंदिर जाने, तिलक लगाने,या राम राम कहने में जी मिचलाई शुरू हो जाती थी वे 2014 आते-आते वह मंदिर आने वालों पर टिप्पणी करने से नहीं चूके और जो मंदिरों में विश्वास रखते हैं उनको आंतकवादी विचार कहने के लिए और बतौर सबूत आतंकियों को छोड़कर बेगुनाहों को जेल में डालने का पाप कर...
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अभिनंदन रजनीश शर्मा,अभिनंदन टीम कसूम्बी... कलम उठाने वाले हाथ जब फावड़ा उठा ले तो समझ जाइये,कुछ ठन गयी है.... जी,हाँ! अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ करने की ठानकर ही अपने सपनों की मंजिल पत्रकारिता के व्हाइट कॉलर जॉब को छोड़ रजनीश शर्मा ने अपने गांव को आदर्श गांव बनाने की ठान ली... पिछले ढ़ाई साल में  नागौर जिले की लाडनूँ तहसील के अपने गांव कसूम्बी में 9300 पौधे ना केवल लगाये बल्कि उन्हें जिंदा भी रखने में कामयाबी पाई.... कहते है पहला पग किसी ना किसी को उठाना ही पड़ता है और कसूम्बी में पहला पग रजनीश ने उठाया तो देखते ही देखते युवाओं की टोली,बच्चों की टोली जुड़ती चली गयी तो बुजुर्गों ने आशीर्वाद दे दिया.... अवैज्ञानिक वर्जनाओं को तोड़ती महिलाओं की टोली भी साथ आ खड़ी हुई इस प्रकार टीम कसूम्बी बन गयी जो ना केवल पेड़ लगाती है बल्कि उनके पालन का जिम्मा भी उठाती है.... सार्वजनिक स्थानों पर वृक्षारोपण की हुई शुरुआत तो श्मशान कैसे अछूते रहे, आज गांव के सार्वजनिक श्मसान में हरियाली है तो वनोषधि वाटिका भी,फुलवारी भी है तो बैठने के लिए दर्द में शकुन देती पेड़ों की छांव भी.... विद्यालय,चिकित्सालय स...
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देश चुनावी मोड़ में है पर मोदी सरकार पूरी मूड में है,एक ओर विपक्षियों के गठबंधन है,अपनों के अंदरखाने बगावती सुर तो मोदी भी अपनी टीम के साथ राजनैतिक सक्रियता के साथ साथ सरकार के कामकाज पर असर ना पड़े इसलिए पूरे मूड में है.... आज पहले चरण के नामांकन का  अंतिम दिन था,यानी देश होली के  रंगों से बाहर निकल चुनावी रंग से  रंगना शुरू हो गया,पर सरकार के कामकाज पर आपको कोई असर नहीं दिख रहा..... पाकिस्तान में दो हिन्दू नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दखल इतना प्रभावी था कि पाक प्रधानमंत्री को भी एक्शन मोड़ में आना पड़ा। दूसरी ओर सेना तोप ले जाने वाले हेलीकॉप्टर चिनूक से ताकतवर बनी तो भारत में बनी तोपे  जो बोफर्स भी ताकतवर मानी जाती है,जिसे धनुष नाम दिया गया है वे भी सेना के जखीरे में शामिल कर दी गयी..... नीरव मोदी की गिफ्तारी के बाद एक ओर भगोड़े  हितेश पटेल को धर दबोचा...यानी कोताही कहीं नहीं.... इसके साथ ही मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में बढ़ते आतंक पर नकेल कसने के लिए पुरजोर कोशिश करती हुई दिखाई दे रही है। यासीन मलिक क...
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मोदी का कमल संघ के दण्ड से ऐसे जुड़ा है मानों वो कमल नाल हो,यही कारण है कि कभी संघ को पूरा खत्म करने की सोचने वाले अब उसके एक स्वयंसेवक से ही डरने लगे... लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनैतिक दलों में मच गई उथल-पुथल.... कांग्रेस अपने युवराज की उस छाया से निकलने की झटपटाहत में राजकुमारी को ले आई,तो बहिनजी गेस्ट हाउस कांड को भूल मुलायम सिंह के चुनाव प्रचार को राजी हो गयी.... दिल्ली वाले सरजी सब मिले हुए है वाले जुमले से निकल मुझे भी मिला लो वाली राग में आ गए.... महाराष्ट्र वाले ठाकरे बंधुओं में से छोटे नवनिर्माण वाले इस चुनाव में तौबा कर चुके तो बड़े वाले पानी पी पीकर चार साल कोसते रहे पर अब नमो के साथ हो लिए... इधर कमल वाली पार्टी के शाह अपने ऑपरेशन में लग गये...थोड़ा सा कोई पार्टी वाला बेचैन हुआ नहीं कि दरवाजा खटखटाया गया,किसी को सोते से जगाया गया अकेले उत्तर प्रदेश से ही सपा,बसपा,कांग्रेस के दो दर्जन से बड़े नेता कमलनाल से जुड़ गए तो बंगाल में दो पत्ती वाली ममता बनर्जी की तृणमूल को खोद खोदकर निकाल बाहर करने की कवायद में एक दर्जन सिपहसालार नमो की माला जाप करने लगे है..... यही हा...
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#43 नारी,तुम बदल जाओ ना.... तुम शक्तिस्वरूपा हो,परिवार की विघटक नहीं.... कितना खुश हुई होगी उस दिन जब तुम मुझसे पहली बार मिले थे,यह कहकर मुझे तुम पसन्द हो,क्या मेरे से शादी करोगे,मैं खुशनसीब रहूंगा अगर तुम मेरे साथ जीवन बिताओगी.. अनगिनत शब्द थे,अलंकार भरी भाषा,पर लब्बोलुआब एक था तुम मेरे जीवन के खाली कैनवास पर खुशियों के रंग भरोगे.... मैंने भी माँ-बाबा के कहने पर ...उनकी पसन्द पर ....बिना अपनी पारखी नज़रों को कष्ट दिये, संजोने लगी थी सपने,उम्मीदों के,खुशियों के....उस वक्त घण्टों मुझसे बतियाते थे,कुछ पल की देरी तुम्हें झुंझलाहट से भर देती थी....पर आज तुम्हें वक्त नहीं है अपने बच्चे के लिए,मेरे लिए और तुम मेरे जीवन के खाली कैनवास पर खुशियों के रंग भरने की बजाय....कहते कहते सौम्या की रुलाई फूट पड़ी पर सौरभ ने कंधा उचकाया और जेब से फ़ोन निकालकर माँ को फ़ोन करने दूसरे रूम में चला गया..... एक ओर सौम्या की सिसकियां थी तो दूसरी और सौरभ का माँ के साथ फ़ोन पर हंस हंस कर बतियाना..... मैं दोनों जगह हूँ एक रोती हुई सौम्या के रूप में तो दूसरी ओर सौम्या की सास,सौरभ की माँ के रूप में.... एक जगह ...